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The time has come to return to our old education system and to know the glorious history: Ved Prakash Gupta
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समय आ गया है अपनी पुरानी शिक्षा पद्धति की ओर लौटने व गौरवशाली इतिहास को जानने का : वेद प्रकाश गुप्ता

नई दिल्ली ,पंजाबी बाग – आधुनिक शिक्षा पद्धति केवल अक्षर ज्ञान तो देती है लेकिन वह हमें शिक्षित नहीं बनाती है। यही वजह है कि समाज में आज हर क्षेत्र में अग्रेशन व डिप्रेशन दिखाई देता है। समय आ गया है कि हम अपने गौरवशाली इतिहास को याद करें और युवा पीढ़ी को उसके बारे में बताने के साथ ही आधुनिक शिक्षा पद्धति में उन्हें शामिल कराएं। जिससे आत्मबल व आत्म गौरव की भावना पैदा हो। यह कहना एनबी वर्ल्ड डेवलपमेंट फोरम के चेयरमैन वेद प्रकाश गुप्ता
वह फोरम की ओर से आयोजित साप्ताहिक संगोष्ठी में हिंदू जीवन दर्शन और आधुनिक भारतीय शिक्षा पद्धति विषय पर उसमें मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का काम कैवल अक्षर ज्ञान कराने तक ही सीमित नहीं है बल्कि शिक्षा ग्रहण करने वाले लोगों में दूसरों को अपनी बात समझाने व उनकी बात समझने की योग्यता पैदा करना है।
वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि प्राचीन काल में हमारे देश के हरेक गांव में एक गुरुकुल होता था। जिसमें समाज के सभी वर्गों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते थे। उन्हें शास्त्र व वेद पुराण के साथ ही जीवन में काम। आने वाले प्रत्येक पहलू की शिक्षा दी जाती थी। जिससे उनमें कठिन से कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता पैदा हो जाती थी। इसके विपरीत अंग्रेजों के शासनकाल में शुरू की गई शिक्षा पद्धति जो कि आज तक चली आ रही है में लोगों का मनोबल कमजोर करने का काम किया है। क्योंकि इसमें एक सोची-समझी रणनीति के तहत हमें हमारे गौरवशाली अतीत से वंचित रखा गया है।
संगोष्ठी का आरंभ कवि दिनेश छिम्वाल  ( पथिक )के काव्य पाठ से हुआ। उनके गीत ” गीतों को गाते चलो,हर दम मुस्काते चलो।
इससे गम होंगे कम, सपने नए सजाते चलो।। की संगोष्ठी में मौजूद लोगों ने करतल ध्वनि से सराहना की। उनके जीवन में माता पिता के महत्व को बताने वाली रचना को भी खूब सराहा गया।
संगोष्ठी में शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कई सालों से कार्य करने वाले एस एन मिश्रा ने हिंदू जीवन दर्शन के बारे में किए जा रहे दुष्प्रचार से बाहर निकलने व उसके प्रचार प्रसार के लिए इस तरह को आयोजन को काफी महत्वपूर्ण बताया।
संगोष्ठी में युवा सामाजिक कार्यकत्री रंजना सिंह ने हिंदुओं में एकता न होने व जातिप्रथा की कुरीतियों का मुद्दा उठाया। जिसका उत्तर देते हुए वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि प्राचीनकाल में हमारे यहां जातिप्रथा नाम की कोई चीज नहीं थी। क्योंकि यदि ऐसा होता तो राम के बनवास की आज्ञा देने के बाद सीता जी वाल्मीकि के आश्रम में न रहती। इसी प्रकार रावण ब्राह्मण था जिसका वध क्षत्रिय राम ने किया था। फिर भी ब्राह्मण राम की पूजा करते हैं।
संगोष्ठी में त्रिनगर में गैर सरकारी संगठन चलाने वाले अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि अपने अधिकारों के बारे में तो सबको पता है लेकिन कर्त्तव्य की बात कोई भी नहीं करता। उन्होंने लोगों में छाए अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए एनबी वर्ल्ड डेवलपमेंट फोरम के प्रयासों की सराहना करते हुए इसमें पूर्ण सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
 संगोष्ठी का संचालन रजनीकांत तिवारी ने किया और प्रभावशाली तरीके से इसके विषय पर प्रकाश डाला। इस मौके पर समाज के विभिन्न वर्गों के अनेक गणमान्य  मौजूद थे। जिनमें से नाम उल्लेखनीय हैं ‌। वरिष्ठ पत्रकार आलोक गौड़ ,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  नितिन बात्री ,दिग्विजय कुमार सिंह (प्रदेश अध्यक्ष), ,धनंजय कुमार सिंह, शिव कुमार जैसवाल, एस . एन . मिश्रा, दिनेश छिम्वल, रंजना सिंह, राजेश शर्मा, अशोक कुमार शर्मा और निर्मल जी |

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