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These hull daughters belong to the boat of the river
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दरिया की नाव की है ये पतवार बेटियां

नई दिल्ली :- आओ गुनगुनाने गीत व्हाट्सएप समूह के तत्वावधान में बेटी शीर्षक से एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता छंद शिल्पी बृजेंद्र ‘हर्ष’ हरिद्वार ने की।मुख्य अतिथि रहे डॉ कृष्ण कुमार ‘नाज़’ मुरादाबाद ।डॉक्टर सविता चड्ढा जी के सानिध्य में विशिष्ट अतिथि डॉ जयप्रकाश मिश्र के बीच कवि और कवित्रियों ने अपनी शानदार कविताओं का पाठ बेटी पर विषय पर किया। सभी आमंत्रित अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष डॉक्टर जयसिंह आर्य ने किया।मंच संचालन का अच्छा निर्वाह किया डॉक्टर पूनम मटिया ने।गरुग्राम से पधारी कवियत्री श्रीमती वीणा अग्रवाल की मां वाणी की वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।

अध्यक्ष बृजेंद्र हर्ष द्दारा बेटी पर पड़ी इस ग़ज़ल के इन शेरों ने खूब वाहवाही लूटी। उनक ग़ज़ल का मतला वह एक शेर देखें:-

खुशियों से सारे घर का आधार बेटियां हैं।
मानो तो सब की खातिर उपहार बेटियां हैं।
परिवार बहता दरिया रिश्ते हैं उसके साहिल।
दरिया की नाव की यें पतवार बेटियां हैं।

मुरादाबाद से पधारे मुख्य अतिथि डॉ कृष्ण कुमार नाज़ ने बेटियों पर कहा:-

सृष्टि चक्र में डाल रहा क्यों आखिर व्यवधान।
कन्या भ्रूणों की हत्याएं मत कर ऐ इंसान।

डॉक्टर सविता चड्ढा ने दिव्यांग बेटी पर अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए कहा:-

अपाहिज बेटियां मां के कलेजे का टूटा हुआ अंश है
हर रोज मां के सीने पर लगने वाला खामोश दंश है
फिर भी यह बहुत प्यारी है मां की जान हैं
सारा घर इस बेटी पर कुर्बान है

विशिष्ट अतिथि डॉ जयप्रकाश मिश्र गाजियाबाद बेटी पर कुछ यूं कहा:-

जलकर स्वंय रोशनी बांटे वो बेटी कैसा है भार।
मेरी प्यारी बिटिया रानी मेरे जीवन में त्योहार।।

गीतकार जयसिंह आर्य ने बेटियों पर अपनी मुक्तक में कहा:-

बेटियों से न दूर जाओ तुम
साथ खेलो इन्हें खिलाओ तुम
बेटियां बेटों से भी बढ़कर है
मान इनका सदा बढ़ाओ तुम

गुरुग्राम से पधारी कवियत्री इंदु निगम ने कहा:-

जब बड़ी हो गई बेटियां।
बनके वह उड़ गई तितलियां।।

बेटी पर कवि राजेंद्र निगम राज गुरूग्राम का कहना था:-

एक नई दुनिया में जाकर बस जाना सब के दिल में।

यात्रा पूरी हुई तुम्हारी रम जाना सबके दिल में।।

दिल्ली की कवियत्री रजनी श्रीवास्तव का कहना था:-

मैं अपने देश से रिश्ता ही कुछ ऐसा निभाती हूं।

मैं भारत की बेटी हूं सभी के दिल में समाती हूं।

ग्वालियर से पधारे कवि अतुल त्रिपाठी का कहना था बेटी पर:-

हम सोच बदलने अब अपनी बेटियां आगे आने दें।
समुचित सम्मान करें उनका अपना परचम फहराने दें।।

बेटी पर अलवर से पधारी कवियत्री डॉक्टर सीमा विजयवर्गीय ने कहा;-

रोंनके इनकी बदौलत घर में है।
बुलबुलों सीं चहचहाती बेटियां ।

हरियाणा से पधारे कभी भारत भूषण का कहना था:-

बेटियां नूर कुदरत का यें घर को घर बनाती है।
जिंदगी को करें रोशन यें जग को जगमगाती हैं।।

सुप्रसिद्ध कवियत्री डॉक्टर पूनम मटिया का कहना था:-

मारोगे यदि बेटियां खत्म करोगे वंश।
फूटेगा घट पाप का वंश सहेंगे दशं।।

पानीपत से पधारी कवियत्री आराधना सिंह अनु का कहना था:-

अधरों पर मुस्कान रख बोलो मीठे बोल।
घर में खुशियां बांटती बेटी है अनमोल।।

कवि सम्मेलन की सफलता पर संयोजक सुदेश यादव दिव्य ने सभी कवियों व अतिथियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

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