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कोरोनावाइरस : यह लापरवाही घातक साबित हो सकती है

आलोक गौड़

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में दिन रात जुटे हुए डॉक्टर ,नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशव्यापी लाक डाउन के दौरान लोगों से थाली व तालियां तो बेवा लीं। लेकिन उनकी सुरक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के प्राण बचाने के काम में जुटे स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपने प्राण संकट में हैं और वह भी केंद्र और राज्य सरकारों की आपराधिक लापरवाही के कारण।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के मंत्री स्वास्थ्य कर्मचारियों की तारीफ में जुबानी खर्च तो काफी कर रहे हैं। मगर हकीकत में उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की दिशा में कुछ भी नहीं किया है। सरकार की इस घोर लापरवाही के घातक परिणाम स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ ही पूरे देश को भुगतने पड़ सकते हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स) से लेकर दूसरे राज्यों के सरकारी अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज करने करने वाले डॉक्टर , नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के पास संकमण की चपेट में आने से बचने के लिए न तो पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट हैं और न विश्वस्तरीय मास्टर वर्ग ग्लब्स । ऐसे में यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में दिन रात जुटे डॉक्टर,नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की जान को कितना बड़ा खतरा है।
इससे बड़ा मजाक भला और क्या होगा कि एक ओर तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी डॉक्टर और नर्स को सफेद कपड़ों में भगवान का स्वरूप बता रहे हैं। वहीं डाक्टरों और नर्सों की सुरक्षा को ही भगवान के भरोसे छोड़ दिया गया है। इतना ही नहीं उडीसा सरकार ने डाक्टर और नर्स को चार महीने का वेतन एडवांस देने की घोषणा की है। वहीं बिहार सरकार ने इन्हें एक माह का वेतन प्रोत्साहन राशि के रूप में देने का ऐलान किया है। लेकिन डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांग व चिंता जताने के बावजूद उन्हें सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। गौरतलब है कि इटली में कोरोना वायरस की चपेट में आ कर मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या डाक्टर और नर्स की ही है।
देश के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर और नर्स के लिए सुरक्षा उपकरणों का अभाव होने की बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी स्वीकार कर रहा है। स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक इन उपकरणों में लगने वाले पुर्जे रहे
विदेशों से आयात किए जाते हैं। कोऱोना वायरस की महामारी फैलने की वजह से इनके आयात में देरी हो रही है। सरकार इन पुरजौं को शीघ्र ही मंगवाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री मैं को चाहिए कि वह इस दिशा में खुद ठोस कदम उठाए। कहीं ऐसा न हो कि इस मामले में बहुत ज्यादा देरी हो जाए और देश को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़े।

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