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Three years of demonetisation - economic sluggishness and declining trade
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नोटबंदी के तीन साल- आर्थिक सुस्ती और घटता व्यापार

नई दिल्ली || 8 नवंबर 2016 को देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को हिला देने वाली नोटबंदी की जानकारी दी। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आज रात बारह बजे के बाद वर्तमान में जारी 500 और 1000 रूपये के नोट लीगल टैंडर नहीं रहेंगे। इतना सुनना था कि लोगों में खौफ का देखने को मिला। फिर वो हुआ जो भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ था। लोगों को अपने पैसे लेने और लौटाने के लिए घंटों-घंटों बैंक के बाहर लाइनों में खड़े रहे। ये सिलसिला एक या दो दिन नहीं बल्कि कई महीनों तक रहा।  इस दौरान छुट-पुट घटनाओं के साथ ही लाइनों में लगे कई लोगों की आकस्मिक मौत भी हुई तो कई लोग हार्ट अटैक का शिकार भी हुए। लोगों की बैचेनी को देखते हुए पीएम मोदी ने 50 दिन का समय मांगा और कहा कि इसके बाद आपको कोई समस्या नहीं। इससे विदेशों में जमा काला धन आएगा, आतंकवाद पर लगाम लगेगी और नकली नोटों के धंधे को समाप्त किया जा सकेगा।

नोटबंदी को हुए तीन साल क्या बनी बात

पीएम मोदी के वायदें के बाद लोगों ने सब सहा, चाहे वो लंबी लाइने हो, घंटों कतारों में खड़े रहकर भी खाली हाथ लौट जाना हो या मात्र दो हज़ार रुपये में घर का खर्च चलाना हो। आज नोटबंदी को पूरे तीन साल हो गए है। लोगों के लिए ये बात उतनी पुरानी भी नहीं जिसे यूँ ही भुलाया जा सकें। नोटबंदी के दौरान जहां कारोबार ठप्प हुए। लोग बेरोजगार हुए। देश की आर्थिक व्यवस्था दशकों पीछे चली गई। कई जिंदगियां काल के गाल में समा गई वहीं न तो कालाबाजारी बंद हुए न ही कालेधन की वापसी हुई। देश की आर्थिक व्यवस्था पर आए दिन आ रहे रिपोर्ट्स से ये साफ है कि जिस मकसद से नोटबंदी लागू की गई थी, वह पूरी नहीं हुई। इस पर सरकार का तर्क है कि नोटबंदी के बाद टैक्स कलेक्शन बढ़ा और कालेधन में इस्तेमाल होने वाला पैसा सिस्टम में आ गया। लेकिन इससे जुड़े कोई आंकड़े तीन साल के बाद भी सामने नहीं आए।

नोटबंदी मानव निर्मित आपदा- राहुल गांधी

गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा, नोटबंदी ‘आतंकी हमला’ को तीन साल गुजर गए हैं, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया, कई लोगों की जान ले ली, कई छोटे कारोबार खत्म कर दिए और लाखों भारतीयों को बेरोजगार कर दिया।  उन्होंने हैशटैग, डीमोनेटाइजेशन डिजास्टर का प्रयोग करते हुए कहा कि इस ‘निंदनीय हमले’ के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के समक्ष लाया जाना बाकी है। राहुल गांधी ने नोटबंदी को मानव निर्मित आपदा बताने के लिए वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज का भारत सरकार की रेटिंग पर परिदृश्य में बदलाव करते हुए उसे घटाकर नकारात्मक किए जाने का भी हवाला दिया।  सुरजेवाला ने नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर, सत्ता में बैठे लोगों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।

नोटबंदी पर चली आर्थिक अर्थव्यवस्था भूली विकास की राह

नोटबंदी के बाद जीडीपी को झटका लगा, जिससे देश अबतक नहीं उबर पाया है। नोटबंदी की घोषणा के बाद की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्ध‍ि दर घटकर 6.1 फीसदी पर आ गई थी। जबकि इसी दौरान साल 2015 में यह 7.9 फीसदी पर थी। मौजूदा समय में जीडीपी विकास दर गिरकर 5 फीसदी पर आ गई, जो पिछले छह साल में सबसे निचला तिमाही आंकड़ा है। भारत की अर्थव्यवस्था और ठप्प होते बाजार पर पहले भी कई रिपोर्ट्स आ चुके है।  देश में बेरोजगारी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। नोटबंदी के दौरान की छोटे व्यापार ठप्प हो गए। जिसका खामियाजा आज देश को भुगतना पड़ रहा है।  ऐसे में मोदी सरकार के लिए नोटबंदी की नाकामियों से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है।

 

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