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आज का सुविचार

“समुन्द्र” में चाहे कितना ही अधिक”पानी” क्यों ना हो, वह “नाव”को तब तक नहीं “डुबो” सकता।जब तक कि उसे “नाव” में “प्रवेश”ना मिले।*
ठीक उसी प्रकार “संसार” में चाहे कितनी ही अधिक “बुराई”क्यों ना हो, वह “इंसान” को तब तक “बुरा” नहीं बना सकती जब तक कि “इंसान” उसे अपने अन्दर”प्रवेश” ना करने दे।

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