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Tribute paid on the 124th sacrifice day of the Hindu religion protector, P. Lekhram
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हिन्दू धर्म रक्षक,प.लेखराम के 124 वें बलिदान दिवस पर दी श्रद्धांजली

गाजियाबाद,,केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में अमर शहीद, रक्त साक्षी पंडित लेखराम के 124 वें बलिदान दिवस पर ऑनलाइन श्रद्धांजलि अर्पित की गई।उल्लेखनीय है कि पण्डित  लेखराम ने घर वापिसी अभियान को गति प्रदान की ओर जो हिन्दू भाई बहन किसी कारण से मुस्लिम या ईसाई बन गए थे उन्हें शुद्ध करके पुनः वैदिक धर्म की दीक्षा दी।
उन्होंने वेद विरोधी मुस्लिम विद्वानों को शास्त्रार्थ की चुनौतियां दी वही उनकी हत्या व बलिदान का कारण बनीं। 6 मार्च,1897 को एक मुस्लिम युवक ने पं. लेखराम  के लाहौर स्थित निवास पर सायं 7 बजे पहुंच कर छुरे को उनके पेट में घोप कर हत्या कर दी और हिन्दू धर्म की बलिवेदी पर वो शहीद हो गए।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि पं. लेखराम ने महर्षि दयानन्द की वैदिक मान्यताओं, सिद्धान्तों व उद्देश्यों के प्रचार को ही अपने जीवन का उद्देश्य बनाया था और अपनी योग्यता व पुरुषार्थ से वैदिक धर्म की महत्वपूर्ण सेवा व रक्षा की,उन्होंने अपने आगे पीछे कपड़े पर आर्य समाज के नियम लिखकर टांग रखे थे ।
सम्पूर्ण आर्य जगत् व सभी वैदिक धर्मी उनकी सेवाओं एवं बलिदान के लिए सदा-सदा के लिए ऋणी व कृतज्ञ हैं।उनके बलिदान ने यह सिद्ध कर दिया कि वैदिक धर्म के विरोधियों के पास वेद और आर्यसमाज के सिद्धान्तों की काट व उनका उत्तर नहीं है।आज फिर से प.लेखराम जैसे वीरो की आवश्यकता है जो शास्त्रार्थ से वेद विरुद्ध बातों का युक्ति युक्त उत्तर दे सके और विधर्मी हुए लोगों को शुद्ध करके वापिस हिन्दू धर्म में दीक्षा दे सके।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महेंद्र भाई ने कहा कि महर्षि दयानंद जी की शिक्षाओं को जन जन तक पहुचाने का कार्य प.लेखराम ने किया उनका बलिदान सदियों तक हिन्दू धर्म की रक्षा का संदेश देता रहेगा।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि  धर्मवीर पण्डित लेखराम ने अपनी नश्वर देह का त्याग करते हुए आर्यो को यह सन्देश दिया था, ‘‘तकरीर व तहरीर से प्रचार का कार्य बन्द न हो।” आज आर्यों को उनकी इस वसीयत को पूरा करना है,तभी भविष्य में वेदाज्ञा ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ चरितार्थ हो सकता है।
योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने इस अवसर पर आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सिपाही रही महान देशभक्त,साहसी एवं स्वाभिमानी महिला कैप्टन नीरा आर्या की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।उन्हें भारत की “पहली महिला जासूस”  के रूप में भी जाना जाता है।
इस अवसर पर आचार्य गवेन्द्र शास्त्री,हरिओम शास्त्री,धर्मपाल आर्य,देवेन्द्र भगत,राम कुमार सिंह,आनन्द प्रकाश आर्य,डॉ रचना चावला,विजय हंस,दीप्ती सपरा,सुदेश आर्या,विभा भारद्वाज,किरण सहगल,संध्या पांडेय आदि उपस्थित थे।

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