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काम के प्रति सच्ची निष्ठा ही असफलताओं को दूर कर कामयाबी के समीप लाती है

अगर हम काम के प्रति सच्ची श्रद्धा और लगन की भावना रखते है तो हमें कामयाबी जरूर मिलती है चाहे राह में कितनी भी रूकावटें क्यों न हो। कई बार हम काम में बार-बार आ रही रूकावटों के आगे खड़े रहने की हिम्मत नहीं कर पाते और मात्र इसलिए ही हम सफल नहीं हो पाते। दोस्तों आप किसी काम में नाकाम होने के बाद भी किसी काम को कितनी शिद्दत से करते रहेंगे। जाहिर है अगर हम किसी को करने की ठान ले तो उसे पूरा करना चाहते है। अगर पहली बार सफलता नहीं मिलती है तो हम दूसरी बार प्रयास करते है। दूसरी बार फिर असफल होने पर हम तीसरी बार फिर से प्रयास करते है, फिर चौथी बार शायद ही कोई बिना झिझक के पांचवी बार उस काम को फिर से करने की कोशिश करता है। लेकिन अगर मैं कहूँ कि हमें लगातार असफल होने के बाद भी काम करते रहना चाहिए तो आप क्या कहेंगे। जाहिर आप कहेंगे क्या बकवास है मैं बार-बार असफल होकर अपना समय क्यों बर्बाद करूँगा जबकि सच तो ये है कि अपने हर प्रयास के साथ आप अपनी कामयाबी के करीब पहुँचते जाते बेशक हमें उस काम में मनचाही सफलता न मिली हो पर असफल होने के साथ ही हमें असफलता के कारण का एहसास हो जाता है। तभी तो 999 बार असफल होने के बाद 1000 बार  महान वैज्ञानिक Elbert Einstein को सफलता मिली। उनकी लगनशीलता का परिणाम है कि इस सफलता के बाद उन्होनें कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

एक बार की बात है Elbert Einstein अपनी laboratory मे कोई काम कर रहे थे, तो उनकी पत्नी उनके लिए खाना लेकर आई लेकिन उन्हें काम मे खोया हुआ देखकर वो उनकी थाली रख कर चली गयी। उन्होने सोचा की जब भी काम से फुरसत मिलेगी, वो खाना खा लेंगे। साथ ही Einstein के सहयोगी मित्र भी काम पर लगे थे। खाने की थाली देखकर उनकी भूख भड़क गयी और वो Einstein को छोड़कर खाना खाने के लिए चले गए। उन्होने अपने खाने के साथ Einstein का खाना भी खा लिया। Einstein पूरी लगन के साथ अपने काम मे लगे थे। जब उन्होने अपना काम निपटा लिया तो वो खाना खाने के लिए अपने table के पास गए तो उन्होने देखा सभी बर्तन खाली है। उन्होने सोचा की शायद मै खाना खा चुका हु और फिर पानी पीकर वापिस अपने काम मे लग गए। उनके सभी सहयोगी उनके काम के प्रति लगन को देखकर सभी उनके मुरीद हो गए। इससे हमें यह पता चलता है कि किसी भी कार्य में सफता के लिए जरूरी है उस काम के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाना।

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